इस शीर्षक पुस्तक का, श्वालबाख के सभागृह में, 10 सितम्बर 2013 को, भव्य लोकार्पण किया गया। श्वालबाख के 70 पुराने और नये नागरिकों ने इस पुस्तक में अपने निजी अनुभवों को प्रस्तुत किया है। इन में हाइडेमरी पाण्डेय तथा इन्दु प्रकाश पाण्डेय भी शामिल हैं। इस पुस्तक में एक-एक जीवन एक ऐसी पज़ल (puzzle) की तरह प्रस्तुत हुआ है जो अलग-अलग होते हुए भी अपने में स्मूर्ण है। इस से यह स्पष्ट हो जाता है कि किस तरह महानगर के पास एक छोटे शहर में ठोस संघटन बन जाता है। इसलिए यह पुस्तक श्वालबाख की सीमा के बाहर भी प्रेरणादायक हो सकती है। पुस्तक की प्रशंसा करते हुए इस लोकार्पण समारोह का समापन गोएटे विश्वविद्यालय के शिक्षाशास्त्र विभाग की अवकाशप्राप्त प्राध्यापिका हाइडे कालेर्ट ने किया.